Top 5 This Week

Related Posts

काली माता मंदिर पर हमले को लेकर हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया

पाकिस्तान के सिंध-हैदराबाद में काली माता मंदिर में अज्ञात लोगों द्वारा तोड़-फोड़ की गई है, जिससे इलाके के हिन्दू निवासियों में डर फैल गया है। इसके घटना के उपरांत हिंदु समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें उन्होंने यातायात रोक दिया और पाकिस्तान में हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थन में नारे लगाए।

प्रशासन के अनुसार मंदिर पर हुए हमले का विवरण और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान अभी भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस के हस्तक्षेप और दोषियों को सज़ा देने के वादे से अब शांति बहाल हो गई है।

इससे पहले पाकिस्तान (सिंध हैदराबाद) में काली माता मंदिर पर हमले को लेकर वहाँ के निवासी हिन्दू समुदाय के बीच तनाव की स्थिति देखी गई है। हैदराबाद, दक्षिणी पाकिस्तान के सिंध प्रांत का दूसरा सबसे ज़्यादा आबादी वाला शहर है।

पाकिस्तान एक अशिक्षित और गरीब देश है जहाँ धर्म के नाम पर बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी को नेताओं और धर्म गुरुओं द्वारा आसानी से भड़काकर अल्पसंख्य समुदायों का उत्पीड़न किया जाता रहा है।

फतेह चौक इलाके में काली माता मंदिर पर हुए हमले ने स्थानीय हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय में गुस्सा और असंतोष भड़का दिया। इसके जवाब में, स्थानीय मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने भी सड़कों पर जाम लगा दिया, जिससे टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अज्ञात लोगों ने काली माता मंदिर के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की, जिससे नुकसान हुआ और पूरे इलाके के हिन्दू समुदाय में डर का माहौल फैल गया। इस घटना ने तुरंत स्थानीय हिंदू समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा और वे तुरंत ही उस स्थान पर इकट्ठा हुए जहाँ मंदिर स्थित है,इसके बाद वहाँ धरने पर बैठ गए।

वहाँ मौजूद लोगों ने पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों की सुरक्षा, और कथित हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए नारे लगाए।

मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट (MQM पाकिस्तान) से जुड़ी नेता और सिंध प्रांतीय असेंबली की पूर्व सदस्य मंगला शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें प्रदर्शनकारी धार्मिक अधिकारों के समर्थन में नारे लगाते और न्याय की मांग करते दिखे। इस फुटेज ने समुदाय की प्रतिक्रिया की तीव्रता और उनकी मांगों की तात्कालिकता को उजागर किया।

प्रदर्शनकारी हिन्दू समुदाय का कहना है कि, धरना तब तक समाप्त नहीं होगा. जब तक, अधिकारी उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे देते और हमलावरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं कर लेते। उन्होंने कहा कि अतीत में समुदाय के कुछ सदस्यों को धमकियां मिली थीं और इसी तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, हालांकि उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी।

प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा की मांग करने में यह कम दृढ़ नहीं था।

धरने के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने नारे लगाते हुए कहा, “हम यहां न्याय और सुरक्षा के लिए आए हैं। जब तक अधिकारी हमारी चिंताओं का जवाब नहीं देते, हम यहां से नहीं हटेंगे।” कानून प्रवर्तन अधिकारी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों के साथ बातचीत की, ताकि तनाव को कम करने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।

कुछ समय पश्चात प्रशासन से मिले आश्वासनों को ध्यान में रख कर दर्शन समाप्त कर दिया गया।

हालांकि तात्कालिक स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है, लेकिन यह घटना एक बार फिर पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदायों के पूजा स्थलों की सुरक्षा को लेकर बनी चिंताओं को उजागर करती है।

धार्मिक नेताओं ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे काली माता मंदिर पर हमले जैसी घटनाओं को रोकने और सभी निवासियों के लिए सुरक्षा की भावना सुनिश्चित करने हेतु दीर्घकालिक उपाय अपनाएँ।

1947 में भारत से अलग होकर पाकिस्तान के बनने के बाद से काली माता मंदिर की तरह, वहाँ के लाखों हिन्दू मंदिरों को तोड़ दिया गया। उस समय की 20% से अधिक हिन्दू आबादी का धर्मांतरण करवाया गया या फिर उनको झूठे केसों में फँसाकर उनकी हत्या कर दी गई। अब वहाँ पर मात्र 2-3 प्रतिशत हिन्दू ही बचे हैं।

 

 

https://www.instagram.com/reels/DXou7J4jRk0/

द्रविड़ शैली में निर्मित भारत के प्रसिद्ध कोविल

"विशिष्ट कोविल" (Specific or Unique Temple) का अर्थ है ऐसा मंदिर (कोविल) जो अपनी वास्तुकला, इतिहास, चमत्कारों, वैज्ञानिक महत्व या किसी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण आम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अद्वितीय होता है। यह कोविल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें 'को' (Ko) का अर्थ होता है 'राजा' या 'भगवान' और इल (Il) का अर्थ होता है 'घर' या 'निवास'; इसलिए, कोविल का शाब्दिक अर्थ है "भगवान का घर"। भारत की प्राचीन भाषाओं या उनसे बनी अन्य बोलचाल की भाषा में इसे देवालय, देवस्थान (देवों का स्थान), मंदिर, मण्डप इत्यादि भी कहा जाता है।

मंदिर और देवालय में क्या अंतर है?

देवालय का अर्थ विशेष रूप से किसी एक साधारण धार्मिक स्थल से जुड़ा होता है, जबकि मंदिर एक संगठित और भव्य निर्माण हो सकता है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों के लिए उपयुक्त होता है। मंदिर की संरचना और आचार विचार अधिक जटिल होते हैं और इसे आमतौर पर पूरे समुदाय द्वारा पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार, देवालय अपने आकार या संरचना में छोटे हो सकते हैं और इनमें पूजा की जा सकने वाली साधारण जगहें होती हैं।समाज में देवालय और मंदिर दोनों का अपनी-अपनी विशेष भूमिकाएँ हैं। जहाँ एक ओर देवालय व्यक्तिगत या छोटे समूहों की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, वहीं मंदिर सामूहिक पूजा, त्योहारों और समारोहों जैसे सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होता है। यह भिन्नता हर धार्मिक परंपरा में दृष्टिगोचर होती है, प्रत्येक ने अपने स्थानों को वेद, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्मित किया है।

भोजशाला एक हिंदू मंदिर है: न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ हिंदुओं का पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है। यह पुष्टि इंदौर उच्च न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर की है। हिंदुओं के लिए यह फैसला केवल किसी इमारत की जीत नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की एक भव्य विजय है जिसे सदियों से दबाकर रखा गया था। यह विजय हिंदुओं के लिए, विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों (मुस्लिम आक्रान्ताओं) द्वारा अतिक्रमित मंदिरों को मुक्त कराने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

Popular Articles