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वीज़ा घोटाले में हैदराबाद वीज़ा मंदिर शामिल; हिन्दू विरोधी अमेरिकन सीनेटर का बयान

“वीज़ा कार्टेल” का हैदराबाद में अपना एक “वीज़ा मंदिर” है, जहाँ हज़ारों भारतीय वेदियों (अग्नि में आहुति (अग्निहोत्र) देने के लिए बनाई गई ऊँची संरचना) की परिक्रमा करते हैं और U.S. वर्क वीज़ा के लिए अपने पासपोर्ट पर आशीर्वाद लेते हैं। अमेरिकी कामगारों को ऐसे सिस्टम से मुक़ाबला नहीं करना चाहिए जिसमें इतनी ज़्यादा हेरा-फेरी होती हो। – एरिक श्मिट (Eric Stephen Schmitt – US senator)

खैर, जिस तरह से अमेरिकी-भारतीय हिंदू दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक हैं, उसे देखते हुए यह बात बड़े सदमे और हैरानी के साथ सामने आई है—एक ऐसी बात जो पाब्लो एस्कोबार को भी डरा दे—कि भारत के मंदिरों में हिंदू देवी-देवता एक ‘वीज़ा कार्टेल’ चला रहे हैं। यह बात कुछ हद तक समझ में भी आती है; शायद इसीलिए हम श्री हनुमान जी को आकाश उड़ते हुए देखते हैं—संभवतः वे अपने साथ उन लोगों को ले जा रहे होते हैं जो अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करना चाहते हैं। यही वजह है कि सीनेटर एरिक श्मिट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए X (ट्विटर) पर एक हिंदू-विरोधी (Hinduphobic) पोस्ट में यह बात कही।

 

सीनेटर एरिक श्मिट का कार्ल श्मिट (Carl Schmitt), जो एक मशहूर नाज़ी था—से कोई रिश्ता है या नहीं, लेकिन हिंदुओं पर उसका हमला उसी तरह की नाजी मानसिकता को दिखाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह उन हिंदुओं पर हमला कर रहा है जो अपनी किसी भी सफलता के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं; इसलिए, अगर वे कहीं और जाकर अपने और दूसरों के भले के लिए कुछ करते हैं, तो इसे एक अच्छी बात के तौर पर ही देखा जाता है। और सबसे महत्वपूर्ण, वे यह कानूनी तौर पर कर रहे हैं, जो कि हिंदू धर्म का तरीका भी है। जबकि अन्य धर्मों के लोग गैरकानूनी तरीकों से अमेरिका या यूरोप में प्रवेश लेते हैं और फिर कुछ समय बाद ही आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर देते हैं।

अमेरिका में शायद हिंदू-फोबिया को नागरिकता के साथ-साथ कानूनी तौर पर भी सामान्य बना दिया गया है; यही वजह है कि भारतीयों, यानी हिंदुओं के प्रति नस्लीय और धार्मिक नफ़रत को वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों ही खेमों द्वारा; सार्वजनिक तौर पर सामान्य मान लिया गया है। इसकी ताज़ा मिसाल रिपब्लिकन पार्टी (जिसे ‘ग्रैंड ओल्ड पार्टी’ भी कहा जाता है, और जो अपनी नस्लवादी मानसिकता (racist mindsets) के चलते जल्द ही ‘ग्रैंड ओल्ड चपाती’ में तब्दील होती दिख रही है) के सीनेटर एरिक श्मिट की टिप्पणियाँ हैं।

अमेरिका में आधिकारिक तौर पर 100 प्रतिशत आतंकी घटनाएं मुस्लिम आतंकवादीओं ने की, जिसके कारण आम अमेरिकन में उनके प्रति नफरत तो है लेकिन डर की वजह से उन घटनाओं या अपराध की आलोचना न तो कोई सीनेटर कर पाते है और न ही उनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत जुटा पते।

जबकि, अमेरिका के कुछ राजनैतिज्ञ और आपराधिक सोच वाले लोग भारत या हिन्दू संगठनों और हिन्दू व्यापारियों से पैसा वसूलने के लिए हिन्दू-विरोधी मुहिम चलाते हैं जिसके एवज़ में उनको भारी-भरकम रकम मिल जाति है।

US Visa Scam: Hindu Gods Involved In Professional Visa Scam According To Senator Eric Schmitt

 

US सीनेटर एरिक श्मिट ने दावा किया है कि एक “वीज़ा कार्टेल” का हैदराबाद में “अपना वीज़ा मंदिर” है। US के H-1B वीज़ा प्रोग्राम की आलोचना तेज़ करते हुए, उन्होंने चिलकुर बालाजी मंदिर (Visa Temple) का ज़िक्र किया।

X पर पोस्ट की एक सीरीज़ में, मिसौरी के रिपब्लिकन सीनेटर ने हैदराबाद के पास स्थित चिलकुर बालाजी मंदिर की एक तस्वीर भी शेयर की। इस मंदिर को “वीज़ा मंदिर” या वीजा गॉड (visa god) के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे एक आम मान्यता है कि यहाँ की गई प्रार्थनाओं से भक्तों को विदेश का वीज़ा, खासकर अमेरिका जाने का वीज़ा मिल जाता है।

H-1B वीज़ा सिस्टम पर एक US सीनेटर के हमले ने भारतीय प्रोफेशनल्स को सवालों के घेरे में ला दिया है; उन पर एक तथाकथित ‘वीज़ा कार्टेल’ से फ़ायदा उठाने का आरोप लगाया गया है। लेकिन आँकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं।

H-1B अप्रूवल में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 70% है, वे अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों को लीड करते हैं, US के अस्पतालों को चलाते हैं, और देश के सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले और सबसे ज़्यादा टैक्स देने वाले समुदायों में से एक हैं। तो फिर उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?

यह रिपोर्ट सीनेटर एरिक श्मिट के दावों, अमेरिका में वीज़ा को लेकर हो रहे विरोध के पीछे की राजनीति, और अमेरिका के विकास में भारतीय-अमेरिकियों के ज़बरदस्त योगदान की आर्थिक सच्चाई की पड़ताल करती है।

इन सभी बयानों को देखकर यही प्रतीत होता है कि, अमेरिका के राजनैतिज्ञ और आर्थिक आपराधिक सोच वाले पैसा वसूलने के लिए हिन्दू-विरोधी मुहिम चलाते हैं जिसके एवज़ में उनको भारी-भरकम रकम मिल जाति है।

द्रविड़ शैली में निर्मित भारत के प्रसिद्ध कोविल

"विशिष्ट कोविल" (Specific or Unique Temple) का अर्थ है ऐसा मंदिर (कोविल) जो अपनी वास्तुकला, इतिहास, चमत्कारों, वैज्ञानिक महत्व या किसी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण आम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अद्वितीय होता है। यह कोविल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें 'को' (Ko) का अर्थ होता है 'राजा' या 'भगवान' और इल (Il) का अर्थ होता है 'घर' या 'निवास'; इसलिए, कोविल का शाब्दिक अर्थ है "भगवान का घर"। भारत की प्राचीन भाषाओं या उनसे बनी अन्य बोलचाल की भाषा में इसे देवालय, देवस्थान (देवों का स्थान), मंदिर, मण्डप इत्यादि भी कहा जाता है।

मंदिर और देवालय में क्या अंतर है?

देवालय का अर्थ विशेष रूप से किसी एक साधारण धार्मिक स्थल से जुड़ा होता है, जबकि मंदिर एक संगठित और भव्य निर्माण हो सकता है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों के लिए उपयुक्त होता है। मंदिर की संरचना और आचार विचार अधिक जटिल होते हैं और इसे आमतौर पर पूरे समुदाय द्वारा पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार, देवालय अपने आकार या संरचना में छोटे हो सकते हैं और इनमें पूजा की जा सकने वाली साधारण जगहें होती हैं।समाज में देवालय और मंदिर दोनों का अपनी-अपनी विशेष भूमिकाएँ हैं। जहाँ एक ओर देवालय व्यक्तिगत या छोटे समूहों की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, वहीं मंदिर सामूहिक पूजा, त्योहारों और समारोहों जैसे सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होता है। यह भिन्नता हर धार्मिक परंपरा में दृष्टिगोचर होती है, प्रत्येक ने अपने स्थानों को वेद, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्मित किया है।

भोजशाला एक हिंदू मंदिर है: न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ हिंदुओं का पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है। यह पुष्टि इंदौर उच्च न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर की है। हिंदुओं के लिए यह फैसला केवल किसी इमारत की जीत नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की एक भव्य विजय है जिसे सदियों से दबाकर रखा गया था। यह विजय हिंदुओं के लिए, विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों (मुस्लिम आक्रान्ताओं) द्वारा अतिक्रमित मंदिरों को मुक्त कराने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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