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भोजशाला एक हिंदू मंदिर है: न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ हिंदुओं का पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है। यह पुष्टि इंदौर उच्च न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर की है। हिंदुओं के लिए यह फैसला केवल किसी इमारत की जीत नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की एक भव्य विजय है जिसे सदियों से दबाकर रखा गया था। यह विजय हिंदुओं के लिए, विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों (मुस्लिम आक्रान्ताओं) द्वारा अतिक्रमित मंदिरों को मुक्त कराने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

‘धार की भोजशाला’ मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर है। यह स्थल मूल रूप से परमार वंश के प्रतापी राजा भोज (1000–1055 ईस्वी) द्वारा निर्मित एक विशाल संस्कृत विद्यालय और मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर है।

दशकों से यह परिसर ‘भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद’ के नाम से एक बड़े कानूनी और धार्मिक विवाद का केंद्र रहा है। 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर खंडपीठ) ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इसे पूर्ण रूप से हिंदू मंदिर घोषित किया है।

धार की भोजशाला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • निर्माण: राजा भोज ने 1034 ईस्वी में इस भव्य परिसर का निर्माण ‘सरस्वती सदन’ के रूप में कराया था, जो प्राचीन काल में तक्षशिला और नालंदा की तरह शिक्षा, दर्शन, ज्योतिष और कला का एक प्रमुख केंद्र था।
  • मां वाग्देवी की प्रतिमा: सन 1035 में यहाँ वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती (वाग्देवी) की दिव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी। वर्तमान में यह मूल प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है।
  • विदेशी मुस्लिम आक्रमण: इतिहासकारों के अनुसार, 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने मालवा पर आक्रमण कर इस शिक्षा केंद्र को भारी क्षति पहुँचाई। बाद में इसी मलबे और खंभों का उपयोग करके परिसर के एक हिस्से को मस्जिद का रूप दे दिया गया, जिसे मुस्लिम पक्ष सूफी संत कमाल-उद-दीन के नाम पर ‘कमाल मौला मस्जिद’ कहा जाने लगा।

भोजशाला का ASI सर्वे और हाईकोर्ट का फैसला

साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर याचिका के बाद, हाई कोर्ट के आदेश पर ASI ने 98 दिनों तक अत्याधुनिक तकनीकों से यहाँ वैज्ञानिक सर्वे किया। इस सर्वे की 2,000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में मंदिर होने के पुख्ता प्रमाण मिले इनमें,

  • मंदिर स्थापत्य: परिसर में मिले 188 स्तंभों पर सनातन धर्म के प्रतीक, देवी-देवताओं की आकृतियां और मंदिर शैली की नक्काशी पाई गई।
  • मूर्तियां और अवशेष: सर्वे के दौरान गणेश, नरसिंह, भैरव और हनुमान जी की खंडित मूर्तियां तथा सनातन संस्कृति से जुड़े 1,700 से अधिक प्राचीन अवशेष व सिक्के मिले।
  • संस्कृत शिलालेख: दीवारों और पत्थरों पर संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे व्याकरण के नियम और श्लोक उकेरे हुए पाए गए।

इन सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संरचना का धार्मिक स्वरूप हमेशा से एक मंदिर का रहा है। कोर्ट ने हिंदुओं को नियमित पूजा का अधिकार दिया।

बीजेपी के राष्टीय स्तर के नेता अमित मालवीय ने भी इस बात की पुष्टि अपने X अकाउंट से की है।

हिन्दू पूजा स्थलों को मुस्लिम धर्म के अतिक्रमण से मुक्ति की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है,  माँ सरस्वती के मंदिर भोजशाला की हिंदुओं द्वारा पुनःप्राप्ति के लिए आंदोलन एवं निरंतर प्रयास शामिल रहे हैं। इनमें ‘भोजशाला मुक्ति आंदोलन’ के नेता श्री नवलकिशोर शर्मा और ‘हिंदू जनजागृति समिति’ का योगदान भी शामिल है।

विष्णु शंकर जैन अपने X हैन्डल पर लिखते हैं,

धार में भोजशाला को वापस पाने के लिए, कई हिन्दू संगठनों ने न केवल सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए।

गोवा में हर साल आयोजित होने वाले ‘वैश्विक हिंदू राष्ट्र महोत्सव’ (अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र अधिवेशन) के राष्ट्रीय मंच के माध्यम से, इस मुद्दे से संबंधित कानूनी और रणनीतिक प्रस्ताव हर साल पारित किए गए, जिससे इस आंदोलन की दिशा तय करने में मदद मिली।

देश भर के हिंदू संगठनों ने इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार, दोनों से लगातार अपील की। ​​अब अदालत के ऐतिहासिक फैसले के साथ, “धार की भोजशाला एक हिन्दू मंदिर है” आखिरकार न्याय मिल गया तथा इसने लाखों हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान किया है।

धार की भोजशाला इंदौर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर धार जिला मुख्यालय में स्थित है। अपनी अद्भुत वास्तुकला, नक्काशीदार पत्थरों के खंभों और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह आज भी देश-विदेश के शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है।

 

द्रविड़ शैली में निर्मित भारत के प्रसिद्ध कोविल

"विशिष्ट कोविल" (Specific or Unique Temple) का अर्थ है ऐसा मंदिर (कोविल) जो अपनी वास्तुकला, इतिहास, चमत्कारों, वैज्ञानिक महत्व या किसी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण आम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अद्वितीय होता है। यह कोविल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें 'को' (Ko) का अर्थ होता है 'राजा' या 'भगवान' और इल (Il) का अर्थ होता है 'घर' या 'निवास'; इसलिए, कोविल का शाब्दिक अर्थ है "भगवान का घर"। भारत की प्राचीन भाषाओं या उनसे बनी अन्य बोलचाल की भाषा में इसे देवालय, देवस्थान (देवों का स्थान), मंदिर, मण्डप इत्यादि भी कहा जाता है।

मंदिर और देवालय में क्या अंतर है?

देवालय का अर्थ विशेष रूप से किसी एक साधारण धार्मिक स्थल से जुड़ा होता है, जबकि मंदिर एक संगठित और भव्य निर्माण हो सकता है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों के लिए उपयुक्त होता है। मंदिर की संरचना और आचार विचार अधिक जटिल होते हैं और इसे आमतौर पर पूरे समुदाय द्वारा पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार, देवालय अपने आकार या संरचना में छोटे हो सकते हैं और इनमें पूजा की जा सकने वाली साधारण जगहें होती हैं।समाज में देवालय और मंदिर दोनों का अपनी-अपनी विशेष भूमिकाएँ हैं। जहाँ एक ओर देवालय व्यक्तिगत या छोटे समूहों की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, वहीं मंदिर सामूहिक पूजा, त्योहारों और समारोहों जैसे सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होता है। यह भिन्नता हर धार्मिक परंपरा में दृष्टिगोचर होती है, प्रत्येक ने अपने स्थानों को वेद, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्मित किया है।

वीज़ा घोटाले में हैदराबाद वीज़ा मंदिर शामिल; हिन्दू विरोधी अमेरिकन सीनेटर का बयान

वीज़ा घोटाले में हिंदू देवी-देवता शामिल; हिन्दू विरोधी अमेरिकन सीनेटर का बयान; अमेरिका में आधिकारिक तौर पर 100 प्रतिशत आतंकी घटनाएं मुस्लिम आतंकवादीओं ने की, जिसके कारण आम अमेरिकन में उनके प्रति नफरत तो है लेकिन डर की वजह से उन घटनाओं या अपराध की आलोचना न तो कोई सीनेटर कर पाते है और न ही उनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत जुटा पते। जबकि, अमेरिका के कुछ राजनैतिज्ञ और आपराधिक सोच वाले लोग भारत या हिन्दू संगठनों और हिन्दू व्यापारियों से पैसा वसूलने के लिए हिन्दू-विरोधी मुहिम चलाते हैं जिसके एवज़ में उनको भारी-भरकम रकम मिल जाति है।

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