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द्रविड़ शैली में निर्मित भारत के प्रसिद्ध कोविल

कोविल (Kovil या Koil) तमिल भाषा का शब्द है, जिसका सीधा अर्थ “मंदिर” या “भगवान का निवास स्थान” होता है दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु और केरलम ) में हिन्दू मंदिरों को ‘कोवईल’ या ‘कोविल’ कहा जाता है।

यह कोविल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें ‘को’ (Ko) का अर्थ होता है ‘राजा’ या ‘भगवान’ और इल (Il) का अर्थ होता है ‘घर’ या ‘निवास’; इसलिए, कोविल का शाब्दिक अर्थ है “भगवान का घर”। भारत की प्राचीन भाषाओं या उनसे बनी अन्य बोलचाल की भाषा में इसे देवालय, देवस्थान (देवों का स्थान), मंदिर, मण्डप इत्यादि भी कहा जाता है।

द्रविड़ शैली में निर्मित कोविल

दक्षिण भारत में मंदिर अपनी भव्य द्रविड़ शैली के लिए जाने जाते हैं। यह द्रविड़ वास्तुकला (Dravidian Architecture) दक्षिण भारत की प्रमुख हिंदू मंदिर निर्माण शैली है। चौथी शताब्दी में पल्लव वंश द्वारा शुरू की गई और चोल साम्राज्य द्वारा विकसित इस शैली की मुख्य पहचान ऊंचे पिरामिडनुमा शिखर (विमान), विशाल चारदीवारी, और अलंकृत प्रवेश द्वार (गोपुरम) हैं।

इस द्रविड़ वास्तुकला (Dravidian Architecture) के सर्वश्रेष्ट उदाहरणों में  तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर, मदुरै का मीनाक्षी मंदिर (मीनाक्षी अम्मन कोवईल), हम्पी का  विरुपाक्ष मंदिर आदि।

इन कोवईल में मुख्य आकर्षण इसकी निर्माण संरचना है जिसमें,

  • विमान और गर्भगृह: मुख्य गर्भगृह के ऊपर पिरामिड के आकार का शिखर होता है जिसे ‘विमान’ कहा जाता है। विमान की सतह पर कई मंजिलें और नक्काशी होती हैं।
  • प्राकारम (Prakaram): मुख्य गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए बना बड़ा गलियारा।
  • विशाल प्रांगण: मंदिर चारों तरफ से एक बहुत ऊंची चारदीवारी और विशाल आहाते से घिरा होता है।
  • मण्डपम (Mandapam): मंदिर परिसर में पूजा और धार्मिक आयोजनों के लिए ऊंचे और कई स्तंभों (खंभों) वाले बड़े-बड़े मण्डपम (Mandapam) होते हैं। इनमें ‘हजार खंभों वाले मण्डपम’ (1000 Pillar Hall) अत्यंत सामान्य हैं।
  • गोपुरम (Gopuram): मंदिरों के प्रवेश द्वार पर ऊंचे और कलात्मक पिरामिड जैसे टावर होते हैं, जिन पर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां बनी होती हैं।
    विशिष्ट कोविल

विशिष्ट कोविल (Unique Temple) क्या हैं?

“विशिष्ट कोविल” (Specific or Unique Temple) का अर्थ है ऐसा मंदिर (कोविल) जो अपनी वास्तुकला, इतिहास, चमत्कारों, वैज्ञानिक महत्व या किसी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण आम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अद्वितीय होता है।
इसे हम निम्नलिखित ५ मुख्य पैमानों से समझ सकते हैं:

वास्तुकला का चमत्कार (Architectural Marvel)

कुछ कोविल अपने निर्माण के अनूठे तरीकों के लिए विशिष्ट माने जाते हैं। जैसे तंजावुर का बृहदीश्वर कोविल। इसका ८० टन का मुख्य शिखर एक ही पत्थर से बना है और दोपहर में इसकी परछाई जमीन पर नहीं पड़ती। तंजावुर बृहदीश्वर कोविल भगवान शिव का १,००० साल से भी पुराना ऐतिहासिक मंदिर है।

वैज्ञानिक और भौगोलिक जुड़ाव (Scientific Connection)

कई प्राचीन कोविल आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर भी हैरान करने वाला है जैसे, चिदंबरम नटराज कोविल; यह यह मंदिर पृथ्वी के चुंबकीय भूमध्य रेखा (Magnetic Equator) के ठीक केंद्र बिंदु पर स्थित है।

अनोखी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं (Unique Traditions)

ऐसे कोवईल जहाँ भगवान की पूजा किसी विशेष रूप में या विशेष उदेश्य या अनुष्ठान के लिए की जाती है। जिसमें उदाहरण के तौर पर वैथीस्वरन कोविल। यहाँ भगवान शिव की पूजा एक ‘वैद्य’ (डॉक्टर) के रूप में होती है और माना जाता है कि यहाँ की मिट्टी और पानी से बीमारियां ठीक होती हैं।

विशालता और भव्यता (Grandeur)

क्षेत्रफल और नक्काशी के मामले में दुनिया में सबसे बड़ा और भव्य मंदिर श्रीरंगम कोविल है। यह १५६ एकड़ में फैला भारत का सबसे बड़ा मंदिर परिसर है। भगवान विष्णु श्रीरंगम रंगनाथस्वामी कोविल को समर्पित यह मंदिर दुनिया के सबसे बड़े कार्यशील हिंदू मंदिरों में से एक है।

रहस्यमयी मूर्तियां और गर्भगृह (Mysterious Idols)

कुछ मंदिरों में मूर्तियां पारंपरिक पत्थरों की जगह दुर्लभ पदार्थों (सामग्रियों) से बनी होती हैं। जिनमें से एक है पलानी का मुरुगन कोविल। यहाँ भगवान मुरुगन की मूर्ति 9 औषधीय जड़ी-बूटियों और खनिजों (नवभाषणम) के मिश्रण से बनी है, जो एक औषधि का काम करती है। नवपाषाण (Neolithic) का शाब्दिक अर्थ नया पाषाण (पत्थर) है। यह प्रागैतिहासिक काल या पाषाण युग का अंतिम चरण है, जो लगभग 10,000 ईसा पूर्व शुरू हुआ था।

तमिलनाडु के प्रसिद्ध कोविल (Famous Kovils of Tamil Nadu)

दक्षिण भारत में कुछ ऐसे चुनिंदा और अनोखे मंदिर आते हैं, जो अपनी अनूठी परंपराओं, विशिष्ट मान्यताओं, वास्तुकला और इतिहास के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

वैथीस्वरन कोविल (Vaitheeswaran Koil): रोगों को ठीक करने वाला मंदिर

विशिष्टता: यह मंदिर भगवान शिव को एक “वैद्य” (चिकित्सक या डॉक्टर) के रूप में समर्पित है। मान्यता है कि यहाँ प्रार्थना करने और मंदिर के ‘सिद्धामृतम तालाब’ में स्नान करने से त्वचा और शरीर की असाधारण बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
मुख्य आकर्षण: यह स्थान विश्व प्रसिद्ध “नाड़ी ज्योतिष” (ताड़ के पत्तों पर लिखे भविष्यकाल) का मुख्य केंद्र है, जहाँ लोग अपना भविष्य जानने आते हैं।
स्थान: मयिलादुथुराई (Mayiladuthurai) तमिलनाडु।

चिदंबरम नटराज कोविल (Chidambaram Nataraja Temple): ब्रह्मांड का केंद्र

विशिष्टता: यह विश्व के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहाँ भगवान शिव के निराकार रूप की पूजा होती है, जिसे “चिदंबर रहस्यम” कहा जाता है। यहाँ शिव अपने दिव्य नृत्य रूप ‘नटराज’ में विराजमान हैं।
वैज्ञानिक जुड़ाव: आधुनिक विज्ञान और शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मंदिर पृथ्वी के चुंबकीय भूमध्य रेखा (Magnetic Equator) के ठीक केंद्र बिंदु पर स्थित है।
स्थान: चिदंबरम (Chidambaram), तमिलनाडु।

श्रीरंगम रंगनाथस्वामी कोविल (Sri Ranganathaswamy Temple): सबसे बड़ा मंदिर परिसर

विशिष्टता: यह भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का सबसे बड़ा कार्यशील हिंदू मंदिर परिसर है। यह १५६ एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसके चारों ओर ७ विशाल प्राकार (दीवारें) और २१ भव्य गोपुरम बने हैं।
मुख्य आराध्य: यहाँ भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग पर शयन मुद्रा (रंगनाथ) में विराजमान हैं।
स्थान: तिरुचिरापल्ली या त्रिची (Tiruchirappalli also called Tiruchi or Trichy), तमिलनाडु।

तंजावुर बृहदीश्वर कोविल (Brihadisvara Temple) : बिना परछाई वाला वास्तुकला का चमत्कार

विशिष्टता: चोल राजा राजराजा प्रथम द्वारा निर्मित इस १००० वर्ष प्राचीन मंदिर का विमान (मुख्य शिखर) बिना किसी नींव के केवल पत्तों को आपस में जोड़कर बनाया गया है।
अद्भुत तथ्य: दोपहर के समय इस भव्य मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती। इसके शीर्ष पर रखा कुंभम (कैलाश) एक ही अखंड पत्थर से बना है जिसका वजन लगभग ८० टन है।
स्थान: तंजावुर (Thanjavur) या तंजौर , तमिलनाडु

रामेश्वरम रामनाथस्वामी कोविल (Rameswaram Ramanathaswamy Temple) : विश्व का सबसे लंबा गलियारा

विशिष्टता: यह मंदिर भारत के पवित्र चार धामों में से एक है। इस कोविल का प्राकारम (गलियारा) दुनिया का सबसे लंबा गलियारा है, जिसमें लगभग १२२० अत्यंत नक्काशीदार खंभे हैं। यहाँ स्थापित मुख्य शिवलिंग की स्थापना स्वयं माता सीता ने की थी।
स्थान: रामेश्वरम द्वीप (Rameswaram) , तमिलनाडु।

 

मंदिर और देवालय में क्या अंतर है?

देवालय का अर्थ विशेष रूप से किसी एक साधारण धार्मिक स्थल से जुड़ा होता है, जबकि मंदिर एक संगठित और भव्य निर्माण हो सकता है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों के लिए उपयुक्त होता है। मंदिर की संरचना और आचार विचार अधिक जटिल होते हैं और इसे आमतौर पर पूरे समुदाय द्वारा पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार, देवालय अपने आकार या संरचना में छोटे हो सकते हैं और इनमें पूजा की जा सकने वाली साधारण जगहें होती हैं।समाज में देवालय और मंदिर दोनों का अपनी-अपनी विशेष भूमिकाएँ हैं। जहाँ एक ओर देवालय व्यक्तिगत या छोटे समूहों की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, वहीं मंदिर सामूहिक पूजा, त्योहारों और समारोहों जैसे सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होता है। यह भिन्नता हर धार्मिक परंपरा में दृष्टिगोचर होती है, प्रत्येक ने अपने स्थानों को वेद, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्मित किया है।

भोजशाला एक हिंदू मंदिर है: न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ हिंदुओं का पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है। यह पुष्टि इंदौर उच्च न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर की है। हिंदुओं के लिए यह फैसला केवल किसी इमारत की जीत नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की एक भव्य विजय है जिसे सदियों से दबाकर रखा गया था। यह विजय हिंदुओं के लिए, विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों (मुस्लिम आक्रान्ताओं) द्वारा अतिक्रमित मंदिरों को मुक्त कराने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

वीज़ा घोटाले में हैदराबाद वीज़ा मंदिर शामिल; हिन्दू विरोधी अमेरिकन सीनेटर का बयान

वीज़ा घोटाले में हिंदू देवी-देवता शामिल; हिन्दू विरोधी अमेरिकन सीनेटर का बयान; अमेरिका में आधिकारिक तौर पर 100 प्रतिशत आतंकी घटनाएं मुस्लिम आतंकवादीओं ने की, जिसके कारण आम अमेरिकन में उनके प्रति नफरत तो है लेकिन डर की वजह से उन घटनाओं या अपराध की आलोचना न तो कोई सीनेटर कर पाते है और न ही उनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत जुटा पते। जबकि, अमेरिका के कुछ राजनैतिज्ञ और आपराधिक सोच वाले लोग भारत या हिन्दू संगठनों और हिन्दू व्यापारियों से पैसा वसूलने के लिए हिन्दू-विरोधी मुहिम चलाते हैं जिसके एवज़ में उनको भारी-भरकम रकम मिल जाति है।

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