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जम्मू-कश्मीर में उर्दू अब सरकारी पदों के लिए अनिवार्य नहीं

जम्मू-कश्मीर: इल्तिजा मुफ्ती, जम्मू-कश्मीर की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी परीक्षाओं (जैसे तहसीलदार परीक्षा) से उर्दू की अनिवार्यता खत्म करने के खिलाफ श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया और धमकी दी कि, इस कदम के ‘दूरगामी सांस्कृतिक परिणाम’ होंगे।

यह निर्णय पुरानी परंपरा को बदलते हुए, केवल स्नातक (graduation) को योग्यता मानता है। इस कदम से जम्मू के युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस पर PDP जैसे राजनीतिक दल अलगाव की भाषा बोल रहे हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों ने मुस्लिम तुष्टीकरण के चलते, मुस्लिम समुदायों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू भाषा को ही सभी सरकारी पदों के लिए अनिवार्य कर रखा था।

जबकि, जम्मू कश्मीर के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय भाषा जैसे, कश्मीरी, डोगरी, गूजरी और पहाड़ी जैसी अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं।

अभी तक सरकारी कामकाज में स्थानीय कश्मीरी भाषा की जगह उर्दू भाषा की अनिवार्यता होने से सरकारी विभागों में कश्मीरी गूजर, पहाड़ी और दूर-दराज के ग्रामीण युवाओं प्रतिनिधित्व न के बराबर है।

मीडिया में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती के खिलाफ श्रीनगर साइबर पुलिस ने एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर आतंकवादी और नेता सैयद अली शाह गिलानी का एक राष्ट्रविरोधी वीडियो शेयर किया था।

इस बीच जम्मू-कश्मीर की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर परिवार वाद को बढ़ावा  देने के आरोप लग रहे हैं क्योंकि वह जिस तरह से  आतंकवाद और पाकिस्तान का समर्थन करके वह अपनी बेटी इल्तिजा मुफ्ती को राजनीति में आगे बढ़ रही हैं, उससे पार्टी के अन्य नेता और युवाओं का मनोबल गिर गया है।

द्रविड़ शैली में निर्मित भारत के प्रसिद्ध कोविल

"विशिष्ट कोविल" (Specific or Unique Temple) का अर्थ है ऐसा मंदिर (कोविल) जो अपनी वास्तुकला, इतिहास, चमत्कारों, वैज्ञानिक महत्व या किसी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण आम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अद्वितीय होता है। यह कोविल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें 'को' (Ko) का अर्थ होता है 'राजा' या 'भगवान' और इल (Il) का अर्थ होता है 'घर' या 'निवास'; इसलिए, कोविल का शाब्दिक अर्थ है "भगवान का घर"। भारत की प्राचीन भाषाओं या उनसे बनी अन्य बोलचाल की भाषा में इसे देवालय, देवस्थान (देवों का स्थान), मंदिर, मण्डप इत्यादि भी कहा जाता है।

मंदिर और देवालय में क्या अंतर है?

देवालय का अर्थ विशेष रूप से किसी एक साधारण धार्मिक स्थल से जुड़ा होता है, जबकि मंदिर एक संगठित और भव्य निर्माण हो सकता है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों के लिए उपयुक्त होता है। मंदिर की संरचना और आचार विचार अधिक जटिल होते हैं और इसे आमतौर पर पूरे समुदाय द्वारा पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार, देवालय अपने आकार या संरचना में छोटे हो सकते हैं और इनमें पूजा की जा सकने वाली साधारण जगहें होती हैं।समाज में देवालय और मंदिर दोनों का अपनी-अपनी विशेष भूमिकाएँ हैं। जहाँ एक ओर देवालय व्यक्तिगत या छोटे समूहों की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, वहीं मंदिर सामूहिक पूजा, त्योहारों और समारोहों जैसे सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होता है। यह भिन्नता हर धार्मिक परंपरा में दृष्टिगोचर होती है, प्रत्येक ने अपने स्थानों को वेद, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्मित किया है।

भोजशाला एक हिंदू मंदिर है: न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ हिंदुओं का पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है। यह पुष्टि इंदौर उच्च न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर की है। हिंदुओं के लिए यह फैसला केवल किसी इमारत की जीत नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की एक भव्य विजय है जिसे सदियों से दबाकर रखा गया था। यह विजय हिंदुओं के लिए, विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों (मुस्लिम आक्रान्ताओं) द्वारा अतिक्रमित मंदिरों को मुक्त कराने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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