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‘कॉर्पोरेट जिहाद’ के खिलाफ ‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ देशव्यापी अभियान शुरू

हिंदू जनजागृति समिति द्वारा ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ देशव्यापी अभियान शुरू किया गया और इसके लिए पुणे, महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें बड़ी संकया में लोगों से हिस्सा लिया।

इस अवसर पर भाजपा सांसद (राज्यसभा) डॉ. मेधा कुलकर्णी, ने कहा,  “यह चुनौती ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ से कहीं आगे तक फैली हुई है; हम एक सुनियोजित और व्यापक साज़िश देख रहे हैं, जिसका मकसद भारत की बुनियादी अखंडता को कमज़ोर करना और हर मुमकिन मौके पर देश की एकता को तोड़ना है।

‘कॉर्पोरेट जिहाद’ के ज़रिए हमारी युवा पीढ़ी की विचारधारा और धर्म पर किया जा रहा यह सुनियोजित हमला बेहद चिंताजनक है। यह ज़रूरी है कि न सिर्फ़ सीधे तौर पर इसमें शामिल लोगों को, बल्कि उन्हें गुपचुप तरीके से मदद पहुँचाने वाले पूरे तंत्र और व्यवस्था को भी कानून के दायरे में लाया जाए और उन्हें कड़ी सज़ा दी जाए।

उन्होंने कहा कि, मैं आने वाले दिनों में संसद में ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का यह मुद्दा उठाऊँगी। हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इस बढ़ते जिहाद को रोकने के लिए, कॉर्पोरेट संस्थानों के भारत में प्रवेश करने से पहले ही उन पर कुछ पाबंदियाँ, नियम और शर्तें लगाई जा सकती हैं या नहीं।

‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ के ख़िलाफ़ देशव्यापी अभियान ‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ की शुरुआत पुणे में हिंदू जनजागृति समिति (HJS) द्वारा की गई।

डॉ. कुलकर्णी शिवाजीनगर स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित ‘विशेष संवाद’ कार्यक्रम में बोल रही थीं, जिसका शीर्षक था ‘कॉर्पोरेट जिहाद: क्या है इसकी असलियत?’। इस कार्यक्रम को समाज के विभिन्न वर्गों से ज़बरदस्त समर्थन मिला, जिसमें कॉर्पोरेट क्षेत्र के युवा पेशेवर और पुणे के निवासी भी शामिल थे।

HJS के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे और जानी-मानी लेखिका शेफाली वैद्य ने भी वहाँ मौजूद लोगों का मार्गदर्शन किया। सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती शेफाली वैद्य ने कहा, “नासिक में केवल बहुराष्ट्रीय कंपनी TCS ही नहीं है; बल्कि ‘Lenskart’ जैसी पब्लिक लिमिटेड कंपनी में भी ऐसे असंवैधानिक नियम लागू किए गए हैं, जिनके तहत हिजाब और पगड़ी की अनुमति तो है, लेकिन कुमकुम, तिलक या कलावा जैसे हिंदू प्रतीकों की नहीं। यह भी एक प्रकार का ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ है।”

हिंदुओं के मन में उनके स्कूली दिनों से ही यह मानसिकता बिठा दी जाती है कि अन्य धार्मिक परंपराएं तो स्वीकार्य हैं, लेकिन हिंदू रीति-रिवाज नहीं। परिणामस्वरूप, जब वे कॉर्पोरेट जगत में प्रवेश करते हैं, तो बहुमत में होने के बावजूद, हिंदू चुपचाप सभी अनुचित प्रतिबंधों को स्वीकार कर लेते हैं। इसका अगला चरण TCS नासिक मामले में देखी गई भयानक क्रूरताओं जैसी स्थितियों का सामना करना होता है।

जिस तरह अन्य धर्मों के लोग अपनी परंपराओं का पालन करने के प्रति संगठित और सतर्क रहते हैं, उसी तरह हिंदुओं को भी अपनी धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए और ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ के खिलाफ अपनी आवाज़ उठानी चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो हिंदू समुदाय और विभिन्न संगठन पूरी मज़बूती से उनके साथ खड़े होंगे।”

सभा को संबोधित करते हुए HJS के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने कहा, “आज समाज में घटित हो रही गंभीर घटनाओं को देखते हुए, अब वह समय आ गया है जब इन राक्षसों को मृत्युदंड से भी अधिक कठोर दंड दिया जाए। जिहाद की वह साज़िश, जो 711 ईस्वी में मोहम्मद बिन कासिम के आक्रमण के साथ शुरू हुई थी, आज ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसे विभिन्न रूपों में जारी है।

भारत को एक इस्लामी राष्ट्र में बदलने के उद्देश्य से ‘गज़वा-ए-हिंद’ और ‘विजन 2047’ जैसे लिखित एजेंडे तैयार किए जा रहे हैं। कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार, अजमेर यौन कांड, और केरल के मुख्यमंत्री द्वारा उजागर किया गया ‘रोमियो जिहाद’ जैसी घटनाएं, ये सभी मुस्लिम आबादी बढ़ाने, हिंदू DNA को समाप्त करने और एक विकृत मानसिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्यों से प्रेरित हैं।

इस संकट का सामना करने के लिए, हिंदुओं में ‘स्वबोध’ (अपनी विरासत का आत्म-साक्षात्कार) और ‘शत्रुबोध’ (शत्रु की पहचान) होना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा, माता-पिता के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं, उन्हें हिंदू धर्म की महानता समझाएं, और हर बेटी की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान में सभी लोग एकजुट होकर सहयोग करें।”

‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ देशव्यापी अभियान के इस कार्यक्रम में ‘लव जिहाद’ और ‘राष्ट्र-धर्म’ पर आधारित एक पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिसे लोगों से ज़बरदस्त प्रतिसाद मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत शंखनाद के साथ हुई और इसका समापन संपूर्ण ‘वंदे मातरम’ के गायन के साथ हुआ।

हिंदू जनजागृति समिति द्वारा ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ राष्ट्रव्यापी अभियान के शुभारंभ ने हिंदू समुदाय में उत्साह की एक नई लहर जगा दी है।

 

द्रविड़ शैली में निर्मित भारत के प्रसिद्ध कोविल

"विशिष्ट कोविल" (Specific or Unique Temple) का अर्थ है ऐसा मंदिर (कोविल) जो अपनी वास्तुकला, इतिहास, चमत्कारों, वैज्ञानिक महत्व या किसी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण आम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अद्वितीय होता है। यह कोविल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें 'को' (Ko) का अर्थ होता है 'राजा' या 'भगवान' और इल (Il) का अर्थ होता है 'घर' या 'निवास'; इसलिए, कोविल का शाब्दिक अर्थ है "भगवान का घर"। भारत की प्राचीन भाषाओं या उनसे बनी अन्य बोलचाल की भाषा में इसे देवालय, देवस्थान (देवों का स्थान), मंदिर, मण्डप इत्यादि भी कहा जाता है।

मंदिर और देवालय में क्या अंतर है?

देवालय का अर्थ विशेष रूप से किसी एक साधारण धार्मिक स्थल से जुड़ा होता है, जबकि मंदिर एक संगठित और भव्य निर्माण हो सकता है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों के लिए उपयुक्त होता है। मंदिर की संरचना और आचार विचार अधिक जटिल होते हैं और इसे आमतौर पर पूरे समुदाय द्वारा पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार, देवालय अपने आकार या संरचना में छोटे हो सकते हैं और इनमें पूजा की जा सकने वाली साधारण जगहें होती हैं।समाज में देवालय और मंदिर दोनों का अपनी-अपनी विशेष भूमिकाएँ हैं। जहाँ एक ओर देवालय व्यक्तिगत या छोटे समूहों की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, वहीं मंदिर सामूहिक पूजा, त्योहारों और समारोहों जैसे सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होता है। यह भिन्नता हर धार्मिक परंपरा में दृष्टिगोचर होती है, प्रत्येक ने अपने स्थानों को वेद, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्मित किया है।

भोजशाला एक हिंदू मंदिर है: न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ हिंदुओं का पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है। यह पुष्टि इंदौर उच्च न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर की है। हिंदुओं के लिए यह फैसला केवल किसी इमारत की जीत नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की एक भव्य विजय है जिसे सदियों से दबाकर रखा गया था। यह विजय हिंदुओं के लिए, विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों (मुस्लिम आक्रान्ताओं) द्वारा अतिक्रमित मंदिरों को मुक्त कराने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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