शक्तिपीठ: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह नौ दिवसीय उत्सव देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का प्रतीक है। इसे भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर, देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्तगण देश भर में विभिन्न स्थानों पर स्थित 51 शक्ति पीठों की तीर्थयात्रा और दर्शन भी करते हैं।
नवरात्र में माँ दुर्गा के नौ रूप की पूजा की जाति है जिसमें पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्मांडा, पांचवी स्कंध माता, छठी कात्यायिनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री हैं।
भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में इस पर्व का विशेष महत्व है क्योंकि, 51 शक्तिपीठ में से 12 प्रमुख शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल स्थित हैं।
पश्चिम बंगाल के 12 शक्तिपीठ (List of Shakti Peeth in west bengal):
पश्चिम बंगाल के उन 12 प्रमुख शक्तिपीठों की जानकारी उपलब्ध कर रहे हैं, जहां चैत्र नवरात्रि के दौरान आप दर्शन कर सकते हैं। साथ ही हम आपको बताएंगे कि इन पवित्र स्थलों तक कैसे पहुंचा जा सकता है, हवाई, रेल और सड़क मार्ग द्वारा।
1. कालीपीठ (कोलकाता कालिका शक्तिपीठ):
कोलकाता स्थित कालीपीठ, जिसे कालीघाट मंदिर भी कहा जाता है, भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है।
हवाई मार्ग: नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (कोलकाता एयरपोर्ट) से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: हावड़ा और सियालदह रेलवे स्टेशन से कालीघाट मेट्रो स्टेशन के माध्यम से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग: कोलकाता शहर के विभिन्न हिस्सों से बस, टैक्सी या ऑटो द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
2. नंदीपूर (नंदिनी):
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के सैंथिया रेलवे स्टेशन नंदीपुर स्थित चारदीवारी में है।
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा कोलकाता है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा करनी होगी।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन रामपुरहाट है, जो नंदीपूर से लगभग 18 किलोमीटर दूर है। यहां से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
3. अट्टहास (फुल्लरा):
यह शक्तिपीठ भी बीरभूम जिले में स्थित है। पश्चिम बंगाल के लाभपुर (लाबपुर या लामपुर) स्टेशन से दो किमी दूर अट्टहास स्थान पर माता के अधरोष्ठ (नीचे के होठ) गिरे थे।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 180 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन लाबपुर है, जो अट्टहास से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। यह शक्तिपीठ वर्धमान रेलवे स्टेशन से लगभग 95 किलोमीटर आगे कटवा-अहमदपुर रेलवे लाइन पर है।
4. वक्रेश्वर (महिषमर्दिनी):
वक्रेश्वर शक्तिपीठ बीरभूम जिले में स्थित है। पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के दुबराजपुर स्टेशन से 7 किलोमीटर दूर वक्रेश्वर में पापहर नदी के तट पर माता का भ्रूमध्य (मन:) गिरा था।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 230 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन वक्रेश्वर रोड है, जो मंदिर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है।
5. रत्नावली (कुमारी):
रत्नावली शक्तिपीठ का निश्चित्त स्थान अज्ञात है फिर भी बताया जाता है कि बंगाल के हुगली जिले के खानाकुल-कृष्णानगर मार्ग पर रत्नावली स्थित रत्नाकर नदी के तट पर माता का दायां स्कंध गिरा था।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 96 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन मुर्शिदाबाद है, जो मंदिर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है।
6. विभाष (कपालिनी):
शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के ताम्रलुक ग्राम में विभास शक्तिपीठ स्थित है
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन ताम्रलुक है, जो विभाष से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। साथ ही ये दक्षिण पूर्व रेलवे के कुड़ा स्टेशन से 24 किलोमीटर दूर है।
7. कांची (देवगर्भा):
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में शांति निकेतन के पास बोलपुर में कोपई नदी के किनारे माता का कांची देवगर्भा कंकाली ताला मंदिर स्थित है। यहां देवी जी का कंकाल गिरा था। शक्ति ‘देवगर्भा’ तथा भैरव ‘रुरु’ हैं। यहां देवी कामाक्षी का भव्य विशाल मंदिर है, जिसमें त्रिपुर सुंदरी की प्रतिमूर्ति कामाक्षी देवी की प्रतिमा है।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 180 से 240 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
रेल मार्ग: लगभग 17 ट्रेनें दैनिक आधार पर कोलकाता से बीरभूम तक चलती हैं।
8. किरीट (विमला भुवनेशी शक्तिपीठ):
यह शक्तिपीठ मुर्शिदाबाद जिले में स्थित है।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 200+ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन अजीमगंज है, जो किरीट से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। कोलकाता से मुर्शिदाबाद की 4 घंटे की ट्रैन भी अच्छा विकल्प है।
9. युगाद्या (भूतधात्री शक्तिपीठ):
युगाद्या शक्तिपीठ बंगाल के पूर्वी रेलवे के वर्धमान जंक्शन से 39 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में तथा कटवा से 21 कि.मी दक्षिण-पश्चिम में महाकुमार-मंगलकोट थानांतर्गत ‘क्षीरग्राम’ में स्थित है।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन हावड़ा है, जो युगाद्या से लगभग 45 किलोमीटर दूर है।
10. त्रिस्रोता (भ्रामरी शक्तिपीठ):
यह शक्तिपीठ बीरभूम जिले में स्थित है।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: पूर्वोत्तर रेलवे के सिलीगुड़ी-हल्दी बाड़ी रेलवे लाइन पर स्थित है-रेलवे स्टेशन जलपाई गुड़ी, पश्चिम बंगाल।
11. बहुला (बहुला/चंडिका):
पश्चिम बंगाल से वर्धमान जिला से 8 किमी दूर कटआ के पास केतुग्राम के निकट अजेय नदी तट पर स्थित बाहुल स्थान पर शक्तिपीठ है।
हवाई मार्ग: कोलकाता हवाई अड्डे से सड़क मार्ग से बस के माध्यम से बहुला पहुंच सकते हैं। यहां बहुला के लिए डीलक्स बसें चलाई जाती है। नजदीकी हवाईअड्डा वर्धमान है, जबकि अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा कोलकाता में है।
रेल मार्ग: देश के किसी भी कोने से वर्धमान रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन पकड़कर बहुला मंदिर पहुंच सकते हैं।
12. नलहाटी:
राज्य के बोलपुर शांति निकेतन से 75 किलोमीटर तथा सैंथिया जंक्शन से 42 किलोमीटर दूर नलहरी रेलवे स्टेशन है, इस शक्तिपीठ को कालिका देवी और भैरव को योगेश कहते हैं।
