अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का राजनैतिक जीवन गौरवशाली या गरिमामय कभी नही रहा है, वह हमेशा ही सैनिक और आर्थिक रूप से शक्तिशाली अमेरिका का उपयोग अपनी कुटिल नीति को बढ़ाने के लिए करते रहे हैं। ट्रंप अपनी कुटिल नीति का उपयोग अमेरिका को उन्नत बनने के लिए काम, अपने पारिवारिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा करते रहे हैं।
ग्रीनलैंड, सोमालिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी, कनाडा जैसे उदाहरण है जहां ट्रंप की कुटिल राजनैतिक चाल के बाद उनके साहबजादे या दामाद या बेटी उस देश की यात्रा पर गए और आगे की रूपरेखा तैयार की गई.

अभी दावोस में उनके तानाशाही पूर्ण रवैया और योजनाओं की चर्चा खतम भी नही हुई थी कि एक और अमर्यादित बयान दे डाला जो नाटो के सहयोगी के संबंध में था।
इस बयान को कई सहयोगी देश शहीद हुए सैनिकों के सम्मान को चोट पहुंचाने वाला बता रहे है। इस बयान तुरंत बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अफ़ग़ानिस्तान में नेटो सेना को लेकर दिए उनके बयान पर माफ़ी की मांग कर डाली.
ट्रंप ने गुरुवार को एक इंटरव्यू में दावा किया कि नेटो के सहयोगी देश अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध के मोर्चे से “थोड़ा पीछे” रहे.
स्टार्मर ने ट्रंप के बयान को “अपमानजनक और बेहद शर्मनाक” बताया है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति से माफ़ी मांगने की अपील की.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं अफ़ग़ानिस्तान में जान गंवाने वाले सैनिकों के साहस, बहादुरी और अपने देश के लिए दिए गए बलिदान को कभी नहीं भूलूंगा. ऐसे भी कई लोग थे जो घायल हुए और उन्हें ऐसी चोटें आईं, जिससे उनकी ज़िंदगी बदल गई.”
उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियों को अपमानजनक और सच कहें तो बेहद शर्मनाक मानता हूं. इससे मारे गए या घायल हुए लोगों के प्रियजनों को गहरी ठेस पहुंची है और वास्तव में पूरे देश में इसका असर हुआ है.”
स्टार्मर ने कहा कि अगर उन्होंने “इस तरह से ग़लत बयान दिया होता” तो वह “निश्चित तौर पर माफ़ी मांगते.”
