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मलमास 2026: रौद्र विक्रम संवत २०८३ के अधिकमास में व्रत त्योहार

मलमास: हिंदू वर्ष या विक्रम संवत 2083 का ज्येष्ठ माह, 2 मई 2026, शनिवार से शुरू होकर 29 जून 2026, सोमवार तक चलेगा। इस वर्ष अधिक मास (मलमास) के संयोग के कारण ज्येष्ठ का महीना लगभग 59-60 दिनों का होगा, इसमें 17 मई से 15 जून 2026 तक अधिक मास रहेगा।

हिंदू नव वर्ष या विक्रम संवत, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। यह प्राकृतिक, कृषि और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, साल 2026 में यह 19 मार्च से शुरू होकर ‘रौद्र’ संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के रूप में जाना जाएगा। यह सूर्योदय से ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि रचना का प्रतीक है।

मलमास का प्रारंभ शुक्ल पक्ष से होकर समापन कृष्ण पक्ष में होता है.

ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु के त्रिवि​क्रम स्वरूप की पूजा करते हैं, मलमास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं इसलिए इस महीने में भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप की पूजा की जाती है. इसके अलावा ज्येष्ठ माह में पवनपुत्र हनुमान, शनिदेव, वट वृक्ष और मां गंगा की पूजा करते हैं और जल अर्पण करते हैं.

ज्येष्ठ (ज्येष्ठ मलमास) माह व्रत और त्योहार

05 मई 2026, मंगलवार: एकदंत संकष्टी चतुर्थी, पहला बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
11 मई 2026, मंगलवार: दूसरा बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
13 मई 2026, बुधवार: अपरा एकादशी
14 मई 2026, बृहस्पतिवार: गुरु प्रदोष व्रत
15 मई 2026, शुक्रवार: वृषभ संक्रान्ति, मासिक शिवरात्रि
16 मई 2026, शनिवार: वट सावित्री व्रत, शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस्या
19 मई 2026, मंगलवार: तीसरा बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
20 मई 2026, बुधवार: वरद चतुर्थी व्रत
25 मई 2026, सोमवार: गंगा दशहरा
26 मई 2026, मंगलवार: चौथा बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
27 मई 2026, बुधवार: अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी, पद्मिनी एकादशी
30 मई 2026, शनिवार: अधिक पूर्णिमा व्रत
31 मई 2026, रविवार: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा
02 जून 2026, मंगलवार: पांचवा बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
03 जून 2026, बुधवार: विभुवन संकष्टी व्रत
07 जून 2026, रविवार: अधिक भानु सप्तमी
09 जून 2026, मंगलवार: छठा बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
11 जून 2026, बृहस्पतिवार: परम एकादशी
12 जून 2026, शुक्रवार: शुक्र प्रदोष व्रत
13 जून 2026, शनिवार: अधिक मासिक शिवरात्रि
15 जून 2026, सोमवार: ज्येष्ठ अधिक मास खत्म, मिथुन संक्रान्ति, ज्येष्ठ अधिक अमावस्या
16 जून 2026, मंगलवार: सातवाँ बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
18 जून 2026, बृहस्पतिवार: प्रद्युम्न चतुर्थी
21 जून 2026, रविवार: भानु सप्तमी
23 जून 2026, मंगलवार: आठवाँ बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल
25 जून 2026, बृहस्पतिवार: गायत्री जयंती, निर्जला एकादशी
27 जून 2026, शनिवार: शनि प्रदोष व्रत
29 जून 2026 सोमवार: वट पूर्णिमा व्रत, कबीरदास जयंती, बटुक भैरवी जयंती, ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत, ज्येष्ठ पूर्णिमा

अधिक मास या मलमास या पुरुषोत्तम मास

हिंदी कैलेंडर, विक्रम संवत का तीसरा माह (Jyeshtha Month 2026) ज्येष्ठ 2 मई से शुरू हो रहा है और यह 29 जून तक रहेगा. ज्येष्ठ को जेठ का महीना भी कहते हैं. इस बार ज्येष्ठ माह 30 दिनों का न होकर 59 दिनों का होगा.

आमतौर पर कोई भी महीना 29, से  31 दिनों का होता है, लेकिन इस साल ज्येष्ठ का महीना 59 दिनों का है। क्योंकि इसमें अधिक मास जुड़ रहा है. इसको मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह ज्येष्ठ मलमास कहलाएगा।

हर 2.5 साल में एक बार अधिक मास जुड़ता है. यह जिस माह में जुड़ता है, उसके शुक्ल पक्ष से इसकी शुरूआत होती है. अधिकमास के जुड़ने की वजह से वह महीना 59 या 60 दिनों का हो जाता है.

इस वर्ष अधिक मास ज्येष्ठ माह में जुड़ रहा है, इसलिए वह ज्येष्ठ अधिक मास या ज्येष्ठ मलमास कहलाएगा. इसका प्रारंभ 17 मई रविवार को ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हो रहा है और इसका समापन 15 जून सोमवार को ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या को होगा.

रौद्र विक्रम संवत २०८३

हिंदू नव वर्ष या विक्रम संवत, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। यह प्राकृतिक, कृषि और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, साल 2026 में यह 19 मार्च से शुरू होकर ‘रौद्र’ संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के रूप में जाना जाएगा। यह सूर्योदय से ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि रचना का प्रतीक है।

हिंदू वर्ष (विक्रम संवत) चंद्र कैलेंडर (Lunar Calendar) पर आधारित है, जिसमें 12 महीने होते हैं, लेकिन हर 2.5 साल में एक ‘अधिमास’ (अधिक मास) जुड़ता है जिसको मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

इस वर्ष का नाम ‘रौद्र’ विक्रम संवत है, जो वैश्विक हलचल, तीव्र बदलाव, मौसमी और पर्यावरण में असामान्य घटनाओं का संकेत देता है।

इतिहास में इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को हराकर सनातन धर्म का शासन स्थापित किया था, जिससे इसका नाम विक्रम संवत शुरू हुआ।

हिंदू कैलेंडर, विक्रम संवत के 12 महीने :चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, और फाल्गुन हैं।

वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मलमास की प्रारंभ तिथि: 2 मई 2026 और समापन तिथि: 29 जून 2026 के दौरान 17 मई से 15 जून 2026 तक मलमास रहेगा।

-इति-

द्रविड़ शैली में निर्मित भारत के प्रसिद्ध कोविल

"विशिष्ट कोविल" (Specific or Unique Temple) का अर्थ है ऐसा मंदिर (कोविल) जो अपनी वास्तुकला, इतिहास, चमत्कारों, वैज्ञानिक महत्व या किसी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण आम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अद्वितीय होता है। यह कोविल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें 'को' (Ko) का अर्थ होता है 'राजा' या 'भगवान' और इल (Il) का अर्थ होता है 'घर' या 'निवास'; इसलिए, कोविल का शाब्दिक अर्थ है "भगवान का घर"। भारत की प्राचीन भाषाओं या उनसे बनी अन्य बोलचाल की भाषा में इसे देवालय, देवस्थान (देवों का स्थान), मंदिर, मण्डप इत्यादि भी कहा जाता है।

मंदिर और देवालय में क्या अंतर है?

देवालय का अर्थ विशेष रूप से किसी एक साधारण धार्मिक स्थल से जुड़ा होता है, जबकि मंदिर एक संगठित और भव्य निर्माण हो सकता है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों के लिए उपयुक्त होता है। मंदिर की संरचना और आचार विचार अधिक जटिल होते हैं और इसे आमतौर पर पूरे समुदाय द्वारा पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार, देवालय अपने आकार या संरचना में छोटे हो सकते हैं और इनमें पूजा की जा सकने वाली साधारण जगहें होती हैं।समाज में देवालय और मंदिर दोनों का अपनी-अपनी विशेष भूमिकाएँ हैं। जहाँ एक ओर देवालय व्यक्तिगत या छोटे समूहों की पूजा के लिए उपयुक्त होता है, वहीं मंदिर सामूहिक पूजा, त्योहारों और समारोहों जैसे सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होता है। यह भिन्नता हर धार्मिक परंपरा में दृष्टिगोचर होती है, प्रत्येक ने अपने स्थानों को वेद, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्मित किया है।

भोजशाला एक हिंदू मंदिर है: न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ हिंदुओं का पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है। यह पुष्टि इंदौर उच्च न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर की है। हिंदुओं के लिए यह फैसला केवल किसी इमारत की जीत नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की एक भव्य विजय है जिसे सदियों से दबाकर रखा गया था। यह विजय हिंदुओं के लिए, विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों (मुस्लिम आक्रान्ताओं) द्वारा अतिक्रमित मंदिरों को मुक्त कराने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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