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हेटा होव्स की पुस्तक “पोएट, मिस्टिक, विडो, वाइफ” (द एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लाइव्स ऑफ मिडीवल वूमेन)

हेटा होव्स अपनी पुस्तक पोएट, मिस्टिक, विडो, वाइफ में विद्वान हेटा होव्स ने चार असाधारण शख्सियतों के माध्यम से मध्यकालीन महिलाओं के जीवन का इतिहास प्रस्तुत किया है।

महिलाओं को लेकर एक अतिवादी अपेक्षा मध्यकालीन समय से ही रही है। हेटा होव्स का कहना है, महिलाओं को देवी बेशक न मानें, उनको जैसी वे हैं, उसी रूप में स्वीकार करना भी किसी क्रांति से कम नहीं होगा।

पोएट, मिस्टिक, विडो, वाइफ
(द एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लाइव्स ऑफ मिडीवल वूमेन)
लेखिका : हेटा होव्स
प्रकाशक : ब्लूम्सबेरी कॉन्टिनम
मूल्य : 384 रुपये
(किंडल संस्करण)

मध्ययुगीन यूरोप में (यानी 5वीं और 15वीं सदी के बीच) पुरुष लेखक इस बात पर विचार करते थे : क्या महिलाएं ईव या वर्जिन मैरी जैसी थीं? महिलाओं को लेकर विद्वानों की सोच हमेशा अतिवादी रही। वे या तो पापी, तर्कहीन और इच्छाओं के अधीन मानी गईं और या फिर असंभव ढंग से परम शुद्ध और गुणी।

अपनी पुस्तक पोएट, मिस्टिक, विडो, वाइफ में विद्वान हेटा होव्स ने चार असाधारण शख्सियतों के माध्यम से मध्यकालीन महिलाओं के जीवन का इतिहास प्रस्तुत किया है।

मैरी डी फ्रांस (Marie de France, 1160–1215) 12वीं सदी की कवयित्री थीं, जो अपने संग्रह लाईज के लिए जानी जाती थीं, जिसमें दरबारी प्रेम का जश्न मनाने वाली कथात्मक कविताएं थीं।

जूलियन ऑफ नॉरविच, एक अंग्रेज भिक्षु, जिसे 1373 में एक कोठरी में बंद कर दिया गया था, ने आध्यात्मिक ग्रंथ दिव्य प्रेम के रहस्योद्घाटन की रचना की।

फ्रांसीसी दरबार की एक कुलीन महिला क्रिस्टीन डी पिजान ने अपने पति की मृत्यु के बाद लेखन की ओर रुख किया और आज वह अपनी आदि-नारीवादी रचना द बुक ऑफ द सिटी ऑफ लेडीज के लिए सबसे ज्यादा जानी जाती हैं, जिसकी रचना उन्होंने 1405 के आसपास की थी। और मार्गरी केम्पे, 15वीं शताब्दी की एक तीर्थयात्री और संभवतः अंग्रेजी में पहली आत्मकथा की लेखिका हैं।

हेटा होव्स की पुस्तक में बच्चे के जन्म से लेकर शादी और व्यभिचार तक; यात्रा और काम से लेकर दोस्ती और शक्ति तक; चार महिलाओं के शब्दों के माध्यम से महिला अनुभव की एक विस्तृत शृंखला का वर्णन है, जिसमें कामुकता, पवित्रता, मातृत्व, मौन और स्वतंत्र विचार के अधिकार के संबंध में मध्ययुगीन नारीत्व के तनाव और खिंचाव का विवरण दिया गया है।

होव्स इन महिलाओं के अनुभवों और हमारे अपने अनुभवों के बीच समानताओं को रेखांकित करने के लिए उत्सुक दिखती हैं। अपने पहले बच्चे के जन्म के बाद मार्गरी केम्पे को आध्यात्मिक संकट का सामना करना पड़ा। लेकिन केम्पे के दुख को मोक्ष में बदलना प्रसवोत्तर अवसाद के आधुनिक निदान से कहीं ज्यादा अजीब है। उसके दर्द ने उसे ईश्वर के दर्शन कराए। उसने सफेद कपड़े पहने और मसीह की पीड़ा की नकल करने के लिए अपनी त्वचा में कीलें ठोंक लीं। क्रिस्टीन डी पिजान शुरुआती महिला दार्शनिकों में से एक थीं, जो अपने समाज की एक कल्पनाशील और ऊर्जावान आलोचक थीं।

द बुक ऑफ द सिटी ऑफ लेडीज में वह उल्लेखनीय महिलाओं की कहानियां बताती हैं, जिनमें कुछ बहादुर योद्धा हैं, तो कुछ वफादार पत्नियां और कुछ धन्य संत। इन कहानियों के जरिये वह अपने समय के पूर्वाग्रहों का सावधानीपूर्वक खंडन करती हैं। किताब बताती है कि महिलाओं को अपनी छवि में ढालकर हम उनके साहित्य में मौजूद बहुत-सी खासियतों और खूबसूरती को खो देते हैं। मैरी डी फ्रांस ने लिखा, ‘मैं अपना नाम ‘मैरी’ लिखती हूं, ताकि मुझे याद रखा जाए।’ हेटा होव्स की इस किताब को खासकर उन्हें पढ़ना चाहिए, जो महिलाओं को सिर्फ ऐसी कृति मानते हैं, जिन्हें खुद में बदलाव करने की जरूरत है।

किताब यह कहती है कि महिलाओं को देवी बेशक न मानें, केवल इन्सान के तौर पर उनका सम्मान कर लें और उनको जैसी वे हैं, उसी रूप में स्वीकार करना ही काफी होगा।

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