नवरात्रि: नवरात्रि (या नवरात्र)—एक ऐसा त्योहार जो साल में दो बार आता है और आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है, हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। नौ दिनों तक चलने वाला यह त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों (शक्ति के अवतारों) की पूजा का प्रतीक है। इसे भारत के अलग-अलग हिस्सों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, और भक्त अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित 51 शक्ति पीठों के दर्शन के लिए तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। इस त्योहार का भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में विशेष महत्व है, क्योंकि 51 प्रमुख शक्ति पीठों में से 12 वहीं स्थित हैं।
माँ दुर्गा यह नौ रूपों की पूजा
पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्मांडा, पांचवी स्कंध माता, छठी कात्यायिनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री,
नवरात्रि के 9 दिनों के रंग और प्रसाद (Navratri 9 days Colors)
| दिन-(Day) | रंग-(Color) | भोग-(Bhog) | स्वरूप-(forms) |
| पहला दिन | सफेद | खीर | मां शैलपुत्री |
| दूसरा दिन | लाल | शक्कर से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है. | मां ब्रह्मचारिणी |
| तीसरा दिन | नीला | दूध से बनी चीजों का भोग | मां चंद्रघंटा |
| चौथा दिन | पीला | मालपुआ | मां कुष्मांडा |
| पांचवा दिन | हरा | कच्चे केले की बर्फी | मां स्कंदमाता |
| छठवां दिन | भूरा | शहद से बनी खीर | मां कात्यायनी |
| सातवां दिन | नारंगी | गुड़ से बना हलवा | मां कालरात्रि |
| आठवां दिन | पीकाॅक ग्रीन | नारियल | माता महागौरी |
| नौवां दिन | गुलाबी | हलवा-पूरी और चना | माता सिद्धिदात्री |
शक्तिपीठ क्या हैं?
दुनियाभर के देवी के प्रसिद्ध और पावन मंदिरों में 51 शक्तिपीठ शामिल हैं. वैसे तो 51 शक्तिपीठ माने जाते हैं, लेकिन तंत्र चूड़ामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं.
“शक्ति” अर्थात देवी दुर्गा, जिन्हें दाक्षायनी या पार्वती रूप में भी पूजा जाता है। “अंग या आभूषण” अर्थात, सती के शरीर का कोई अंग या आभूषण, जो श्री विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से काटे जाने पर पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिरा, आज वह स्थान पूज्य है और शक्तिपीठ कहलाता है।
पुराणों के अनुसार देवी सती के शरीर के विभिन्न अंगों से 52 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ था। इसके पीछे यह अंतर्कथा है कि दक्ष प्रजापति ने कनखल (हरिद्वार) में ‘बृहस्पति सर्व’ नामक यज्ञ रचाया। उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन जान-बूझकर अपने जमाता भगवान शंकर को नहीं बुलाया। शंकरजी की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती पिता द्वारा न बुलाए जाने पर और शंकरजी के रोकने पर भी यज्ञ में भाग लेने गईं। यज्ञ-स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित न करने का कारण पूछा और पिता से उग्र विरोध प्रकट किया। इस पर दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर को अपशब्द कहे। इस अपमान से पीड़ित हुई सती ने यज्ञ-अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी। भगवान शंकर को जब इस दुर्घटना का पता चला तो क्रोध से उनका तीसरा नेत्र खुल गया। भगवान शंकर के आदेश पर उनके गणों के उग्र कोप से भयभीत सारे देवता ऋषिगण यज्ञस्थल से भाग गये। भगवान शंकर ने यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल कंधे पर उठा लिया और दुःखी हुए इधर-उधर घूमने लगे। तदनंतर देवी सती के शरीर के अंग वे टुकड़े 52 जगहों पर गिरे। वे ५२ स्थान शक्तिपीठ कहलाए। देवी सती ने दूसरे जन्म में हिमालयपुत्री पार्वती के रूप में शंकर जी से विवाह किया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शक्तिपीठ वे स्थान हैं जहां देवी सती के अंग के टुकड़े गिरे थे। इन स्थानों पर मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा होती है और हर शक्तिपीठ का अपना विशेष महत्व है। पश्चिम बंगाल के ये शक्तिपीठ लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं और नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
पुराणिक ग्रंथों में शक्तिपीठों की संख्या इक्यावन कही गई है। ये भारतीय उपमहाद्वीप (जम्बू द्वीप) में विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं और यह स्थान सर्व सिद्धि दायक और पवित्र माने गए हैं
शक्तिपीठों की सूची (List of Shakti Peeth):
| क्रम सं० | स्थान | अंग या आभूषण | शक्ति | भैरव |
| 1 | हिंगुल या हिंगलाज, कराची, पाकिस्तान से लगभग 125 कि॰मी॰ उत्तर-पूर्व में | ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) | कोट्टरी | भीमलोचन |
| 2 | शर्कररे, कराची पाकिस्तान के सुक्कर स्टेशन के निकट, इसके अलावा नैनादेवी मंदिर, बिलासपुर, हि.प्र. भी बताया जाता है। | आँख | महिष मर्दिनी | क्रोधीश |
| 3 | सुगंध, बांग्लादेश में शिकारपुर, बरिसल से 20 कि॰मी॰ दूर सोंध नदी तीरे | नासिका | सुनंदा | त्रयंबक |
| 4 | अमरनाथ, पहलगाँव, काश्मीर | गला | महामाया | त्रिसंध्येश्वर |
| 5 | ज्वाला जी, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश | जीभ | सिधिदा (अंबिका) | उन्मत्त भैरव |
| 6 | जालंधर, पंजाब में छावनी स्टेशन निकट देवी तलाब | बांया वक्ष | त्रिपुरमालिनी | भीषण |
| 7 | अम्बाजी मंदिर, गुजरात | हृदय | अम्बाजी | बटुक भैरव |
| 8 | गुजयेश्वरी मंदिर, नेपाल, निकट पशुपतिनाथ मंदिर | दोनों घुटने | महाशिरा | कपाली |
| 9 | मानस, कैलाश पर्वत, मानसरोवर, तिब्बत के निकट एक पाषाण शिला | दायां हाथ | दाक्षायनी | अमर |
| 10 | बिराज, उत्कल, उड़ीसा | नाभि | विमला | जगन्नाथ |
| 11 | गण्डकी नदी नदी के तट पर, पोखरा, नेपाल में मुक्तिनाथ मंदिर | मस्तक | गंडकी चंडी | चक्रपाणि |
| 12 | बाहुल, अजेय नदी तट, केतुग्राम, कटुआ, वर्धमान जिला, पश्चिम बंगाल से 8 कि॰मी॰ | बायां हाथ | देवी बाहुला | भीरुक |
| 13 | उज्जनि, गुस्कुर स्टेशन से वर्धमान जिला, पश्चिम बंगाल 16 कि॰मी॰ | दायीं कलाई | मंगल चंद्रिका | कपिलांबर |
| 14 | माताबाढ़ी पर्वत शिखर, निकट राधाकिशोरपुर गाँव, उदरपुर, त्रिपुरा | दायां पैर | त्रिपुर सुंदरी | त्रिपुरेश |
| 15 | छत्राल, चंद्रनाथ पर्वत शिखर, निकट सीताकुण्ड स्टेशन, चिट्टागौंग जिला, बांग्लादेश | दांयी भुजा | भवानी | चंद्रशेखर |
| 16 | त्रिस्रोत, सालबाढ़ी गाँव, बोडा मंडल, जलपाइगुड़ी जिला, पश्चिम बंगाल | बायां पैर | भ्रामरी | अंबर |
| 17 | कामगिरि, कामाख्या, नीलांचल पर्वत, गुवाहाटी, असम | योनि | कामाख्या | उमानंद |
| 18 | जुगाड़्या, खीरग्राम, वर्धमान जिला, पश्चिम बंगाल | दायें पैर का बड़ा अंगूठा | जुगाड्या | क्षीर खंडक |
| 19 | कालीपीठ, कालीघाट, कोलकाता | दायें पैर का अंगूठा | कालिका | नकुलीश |
| 20 | प्रयाग, संगम, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश | हाथ की अंगुली | ललिता | भव |
| 21 | जयंती, कालाजोर भोरभोग गांव, खासी पर्वत, जयंतिया परगना, सिल्हैट जिला, बांग्लादेश | बायीं जंघा | जयंती | क्रमादीश्वर |
| 22 | किरीट, किरीटकोण ग्राम, लालबाग कोर्ट रोड स्टेशन, मुर्शीदाबाद जिला, पश्चिम बंगाल से 3 कि॰मी॰ दूर | मुकुट | विमला | सांवर्त |
| 23 | मणिकर्णिका घाट, काशी, वाराणसी, उत्तर प्रदेश | मणिकर्णिका | विशालाक्षी एवं मणिकर्णी | काल भैरव |
| 24 | कन्याश्रम, भद्रकाली मंदिर, कुमारी मंदिर, तमिल नाडु | पीठ | श्रवणी | निमिष |
| 25 | कुरुक्षेत्र, हरियाणा | एड़ी | सावित्री | स्थाणु |
| 26 | मणिबंध, गायत्री पर्वत, निकट पुष्कर, अजमेर, राजस्थान | दो पहुंचियां | गायत्री | सर्वानंद |
| 27 | श्री शैल, जैनपुर गाँव, 3 कि॰मी॰ उत्तर-पूर्व सिल्हैट टाउन, बांग्लादेश | गला | महालक्ष्मी | शंभरानंद |
| 28 | कांची, कोपई नदी तट पर, 4 कि॰मी॰ उत्तर-पूर्व बोलापुर स्टेशन, बीरभुम जिला, पश्चिम बंगाल | अस्थि | देवगर्भ | रुरु |
| 29 | कमलाधव, शोन नदी तट पर एक गुफा में, अमरकंटक, मध्य प्रदेश | बायां नितंब | काली | असितांग |
| 30 | शोन्देश, अमरकंटक, नर्मदा के उद्गम पर, मध्य प्रदेश | दायां नितंब | नर्मदा | भद्रसेन |
| 31 | रामगिरि, चित्रकूट, झांसी-माणिकपुर रेलवे लाइन पर, उत्तर प्रदेश | दायां वक्ष | शिवानी | चंदा |
| 32 | वृंदावन, भूतेश्वर महादेव मंदिर, निकट मथुरा, उत्तर प्रदेश | केश गुच्छ/ | उमा | भूतेश |
| 33 | शुचि, शुचितीर्थम शिव मंदिर, 11 कि॰मी॰ कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम मार्ग, तमिल नाडु | ऊपरी दाड़ | नारायणी | संहार |
| 34 | पंचसागर, अज्ञात | निचला दाड़ | वाराही | महारुद्र |
| 35 | करतोयतत, भवानीपुर गांव, 28 कि॰मी॰ शेरपुर से, बागुरा स्टेशन, बांग्लादेश | बायां पायल | अर्पण | वामन |
| 36 | श्री पर्वत, लद्दाख, कश्मीर, अन्य मान्यता: श्रीशैलम, कुर्नूल जिला आंध्र प्रदेश | दायां पायल | श्री सुंदरी | सुंदरानंद |
| 37 | विभाष, तामलुक, पूर्व मेदिनीपुर जिला, पश्चिम बंगाल | बायीं एड़ी | कपालिनी (भीमरूप) | शर्वानंद |
| 38 | प्रभास, 4 कि॰मी॰ वेरावल स्टेशन, निकट सोमनाथ मंदिर, जूनागढ़ जिला, गुजरात | आमाशय | चंद्रभागा | वक्रतुंड |
| 39 | भैरवपर्वत, भैरव पर्वत, क्षिप्रा नदी तट, उज्जयिनी, मध्य प्रदेश | ऊपरी ओष्ठ | अवंति | लंबकर्ण |
| 40 | जनस्थान, गोदावरी नदी घाटी, नासिक, महाराष्ट्र | ठोड़ी | भ्रामरी | विकृताक्ष |
| 41 | सर्वशैल/गोदावरीतीर, कोटिलिंगेश्वर मंदिर, गोदावरी नदी तीरे, राजमहेंद्री, आंध्र प्रदेश | गाल | राकिनी/ | वत्सनाभ/ |
| 42 | बिरात, निकट भरतपुर, राजस्थान | बायें पैर की अंगुली | अंबिका | अमृतेश्वर |
| 43 | रत्नावली, रत्नाकर नदी तीरे, खानाकुल-कृष्णानगर, हुगली जिला पश्चिम बंगाल | दायां स्कंध | कुमारी | शिवा |
| 44 | मिथिला, जनकपुर रेलवे स्टेशन के निकट, भारत-नेपाल सीमा पर | बायां स्कंध | उमा | महोदर |
| 45 | नलहाटी, नलहाटि स्टेशन के निकट, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल | पैर की हड्डी | कलिका देवी | योगेश |
| 46 | कर्नाट, अज्ञात | दोनों कान | जयदुर्गा | अभिरु |
| 47 | वक्रेश्वर, पापहर नदी तीरे, 7 कि॰मी॰ दुबराजपुर स्टेशन, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल | भ्रूमध्य | महिषमर्दिनी | वक्रनाथ |
| 48 | यशोर, ईश्वरीपुर, खुलना जिला, बांग्लादेश | हाथ एवं पैर | यशोरेश्वरी | चंदा |
| 49 | अट्टहास, 2 कि॰मी॰ लाभपुर स्टेशन, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल | ओष्ठ | फुल्लरा | विश्वेश |
| 50 | नंदीपुर, चारदीवारी में बरगद वृक्ष, सैंथिया रेलवे स्टेशन, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल | गले का हार | नंदिनी | नंदिकेश्वर |
| 51 | लंका, स्थान अज्ञात, (एक मतानुसार, मंदिर ट्रिंकोमाली में है, पर पुर्तगली बमबारी में ध्वस्त हो चुका है। एक स्तंभ शेष है। यह प्रसिद्ध त्रिकोणेश्वर मंदिर के निकट है) | पायल | इंद्रक्षी | राक्षसेश्वर |
प्रतिवर्ष नवरात्रि के समय भक्त दूर दूर तक यात्रा करके इन पीठों तक दर्शन के लिए जाते हैं।
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